Tag: बाबुल /दर्द का रिश्ता/बेटी

आखिर वो कौन है ….!! ( बेटी )

चाहती है दिलो-ओ -जान से मुझ पे वो कितना मरती है बुनती हर ख्वाब निश दिन भरोसे मेरे जिन्दा रहती है आखिर वो कौन है ….!! रोज़ शाम करे …

बधाई हो ,बेटी हुई है …. (कविता)

” बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ ” अभियान हेतु विशेष बधाई हो ,बेटी हुई है …. (कविता) उत्सव भरा दिन हुआ आज , गाओ सब मिलकर मंगल गान। । जिसकी …

बाबुल की बेटी

मन प्रफुल्लित हुआ अविरल पाकर गुड़िया रूप खिलौना अबसे पहले न हुआ स्पंदन देखकर बेटी का रूप सलोना जब से आई तुम मेरे जीवन में जीने का पाया अंदाज …

नारी तेरे कितने रूप

नारी तेरे कितने रूप, कितना छाँव कहाँ तक धूप?? नारी तेरे कितने रूप| कभी रूप माता का लेकर, तुमने तन में प्राण दिया| जीवन संभले, जीवन संवरे, तुमने अमृत …

बन्नो मेरी…

बन्नो मेरी कैसे भेजूं तुझे ससुराल, क्या रख पाएगा तेरा बन्ना तेरा मुझ सा खयाल !! तू है मासूम कली सी कोमल, मुरझा जाएगी जब देखेगी इस दुनिया मे …

मेरी बच्ची का है जन्मदिन

मेरी बच्ची का है जन्मदिन मेरा आंगन फिर भी उदास गूँजना है संगीत, है कंहा उल्लास हवा सर्द है, फिजा है गमगीन कोयल की तान में भी नहीं मिठास …

क्यूँ हुई वह परायी’

शहनाई की धुन पर… बचपन के आँगन को छोड़ दर्द सहती आई हैं बेटियां… अपने अंश को विदा करते मात-पिता अकथ पीड़ा महसूस करते आये सदा और विदा करा …