Tag: ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआ इक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान है बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना …