Tag: ग़ज़ल (आये भी अकेले थे और जाना भी अकेला है)

ग़ज़ल (आये भी अकेले थे और जाना भी अकेला है)

पैसोँ की ललक देखो दिन कैसे दिखाती है उधर माँ बाप तन्हा हैं इधर बेटा अकेला है रुपये पैसोँ की कीमत को वह ही जान सकता है बचपन में …