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हसरत-ऐ-ज़िद – डी के निवातिया

हसरत-ऐ-ज़िद *** बेवजह करते हो हसरत-ऐ-ज़िद तुम हमारा इम्तिहान क्या लोगे ! मिलाओगे गर नज़रो से नज़र तो खुद ही शर्म से नज़रे झुका लोगे ! भूल न करना …