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सुसंगत — दोहे — डी. के. निवातिया

दोहे मोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव ! कोइ कथन बने औषधि, कोइ दे घने घाव !!………..(१) दोस्त ऐसा  खोजिये, बुरे  समय  हो  साथ ! सुख में …