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सुर……..डी. के. निवातिया !!

पत्थरो में खिला सकते है फूल बस जरा भावनाओ के सुर मिला लीजिये ! हमसफ़र बन जाये गर दुश्मन फिर राहे सफर का  अंजाम क्या कीजिये !! ! ! …