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सादगी

उड़ते बाल जब चेहरे पर आ जाते है लहराती हैं हवाऐ पर्वत गीत गाते हैं | पलकें आपकी तो हया बहुत लुटाती हैं काले बादलों में जैसे मेघ घनघनाते …

सादगी – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

सादगी महफ़िल में हुआ करते हैं चर्चे तेरे हुस्न के ………………….. वल्ला तेरी सादगी पे कौन ना मर जाये …………………….. शायर : सर्वजीत सिंह sarvajitg@gmail.com