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साँसों को डोर —–डी. के. निवातिया

कुछ मीठी सी यादो संग, धुंधले से पलों में खुद को समेट रखा है इनमे ही बंधी है साँसों को डोर, और इनके सिवा जिंदगी में क्या रखा है …