Tag: सलीम रज़ा रीवा

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ-सलीम रज़ा रीवा

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ आख़िरी बार गले तुझ को लगाता जाऊँ oo जाने इस शहर में फिर लौट के कब आऊँगा पर ये वादा है तुझे भूल …

क़िता – 2 ( मुक्तक ) सुब्हे किरण के साथ नई रौशनी मिले : SALIM RAZA REWA

oo सुब्हे किरण के साथ नई रौशनी मिले !! गुलशन के जैसी महकी हुई ज़िंदगी मिले !! ये है दुआ तुम्हारा मुक़द्दर रहे बुलंद  !! तुमको तमाम उम्र ख़ुशी ही ख़ुशी …