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सरहद–मुक्तक–डी के निवातियाँ

भायी न भाई को भाई की सूरत, बँटवारा कर डाला जन्मे थे एक कोख में, लालच ने दुश्मन बना डाला हमने तो सरहदे बनायी थी अमन-ओ-चैन के लिये ज़ालिमो …