Tag: सरसी छंद

बेमतलब को तूल — डी के निवातिया

बेमतलब को तूल (सरसी छंद) *** बातो में हम रोज़ बदलते, सत्य से रहे दूर ! कैसे दशा देश की बदले, सब मस्ती में चूर !! ताज़ा मुददो पर …

नटखट ललन — डी के निवातिया

 नटखट ललन (“सरसी छंद”) ठुमक ठुमक चलते सावरिया, पग पग कदम बढ़ाय छन छन से छनकते  घुंघरू,  मधुर सी धुन सुनाय यशोदा दर खड़ी इतराती, नटखट ललन लुभाय देवलोक से  …

सब उसके हैं खेल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

II छंद – सरसी  II चितचोर माखनचोर है वो, गिरिधर ही गोपाल I रणछोड़ कहो गोकुल ग्वाला,कह डारो नँदलाल II नाम पुकारो कुछ भी उसका,सब उसके हैं खेल I …

अपना देश – डी के निवातिया

अपना देश *** *** *** अलग अलग है भाषा अपनी, अलग अलग है वेश राम चन्द्र जी जहाँ धरे थे, सन्यासी का भेष बहें प्रेम की गंगा जमुना, आपस …