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सनम-अरूण कुमार झा बिट्टू

कितने हंसी वादिया हैं कितने हंसी हैं नजारे तुम सामने मेरे बैठो भर लू मै प्यासी निगाहें इन नैनो की गहराईया क्या सागर भी इसमे समाए होठो की इन …