Tag: शिवदत्त श्रोत्रिय

दूसरो की तलाश में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय जब भी भटकता हूँ किसी की तलाश में थक कर पहुच जाता हूँ तुम्हारे पास में तुम भी भटकती हो किसी की तलाश में ठहर जाती …

पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैं अनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैं कितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने की सच ही तो …

दुनिया में सबसे बड़ा मजहब है

एक कहे मंदिर में रब है दूजा कहे खुदा में सब है तीजा कहे चलो गुरुद्वारा चौथा कहे कहाँ और कब है मैं कहता माँ बाप की सेवा दुनिया …