Tag: वीर रस कविता

वीरों नववर्ष मना लें हम

है तिमिर धरा पर मिट चुकी आज भास्वर दिख रहे दिनमान , शस्य – श्यामला पुण्य धरा कर रही ; वीरों तेरा जयगान ! शुभ मुहुर्त्त में,महादेव को, सिंधु …