Tag: विषमता पर गीत

अब न कोई उमंग दिखे

कहीं रंग दिखे, कहीं बदरंग दिखे। कहीं विरहिणी चिठ्ठी बैरंग दिखे।। किसके किसके तन पर कपडे डाले। आधुनिकता में सभी का अंग दिखे।। हो कैसे स्वप्न साकार समता का। …