Tag: विवेक बिजनोरी की कवितायेँ

मेरी तम्मना (विवेक बिजनोरी)

जीना चाहो तो जीने के बहाने बहुत  हैं, जानता हूँ आपके दीवाने बहुत हैं… फकत एक शाम तो कभी गुजारो साथ में, राज-ऐ-दिल हैं जो तुमको बतानें बहुत  हैं… वक़्त …

मेरी बदनसीबी – मेरा होंसला (विवेक बिजनोरी)

आज होंसलो से ही तो पहचान बन गयी, थी बदनसीबी मेरी आफत-ए-जान बन गयी.. एक कदम आगे बढ़ाया जो फकत, रूबरू हुए शोहरत शान बन गयी.. थी बदनसीबी मेरी …

बाबुल का अंगना – (विवेक बिजनोरी)

बचपन बीता आयी जवानी, डोली है अब मेरी जानी.. छूट जाये बाबुल का अंगना, रीत है कैसी आज निभानी.. कल तक इस घर में थी चहेती, कल जिंदगानी दूजे …

…खून का रिश्ता …-(विवेक बिजनोरी)

क्या मिला ज़िंदगी मे आजतक किसी को, वो रब है सबके लिए जो दे जिंदगानी किसी को खून का रिश्ता वो नहीं जो ऊपर वाले ने दिया है, खून …

बिटिया प्यारी – (विवेक बिजनोरी)

उजियारा लेकर के आयी अँधेरे इस जीवन में, बहुत ख़ुशी थी घर पे सबको, था उल्लास भरा सबके मन में लोग न जाने फिर भी क्यूँ बेटो पे ही …

बेटी की आवाज – कन्या भ्रूण हत्या ( विवेक बिजनोरी)

क्यूँ किया हाँ किया तूने ऐसा मेरे साथ है, मुझको दिया क्यों दिया तूने ऐसा अभिशाप हैं जीने से पहले मुझको मिटाया, हैरत की बात है… क्यूँ किया हाँ …

कामयाबी की चमक – (विवेक बिजनोरी )

“नाकाम था तो लोग ठुकरा गए मुझे, एक राह के पत्थर की तरह रस्ते से हटा गए मुझे आज जब वो पत्थर रत्नों में गिना जाने लगा, तो देखने …

….अपनी तकदीर….- (विवेक बिजनोरी)

ऐ काश के हमने तकदीर ये पायी होती, तेरे दिल के आशियाने में थोड़ी जगह बनायीं होती आपके अपने तो अपने हैं ये जानता हूँ मैं, काश उन अपनों …