Tag: लफ्ज़ मेरे

लफ्ज़ मेरे — डी के निवातिया

लफ्ज़ मेरे *** लफ्ज़ मेरे एक रोज़ ज़माना बोल रहा होगा रफ्ता रफ्ता सबके वो राज़ खोल रहा होगा !! ज्यों ज्यों पढ़े जायेंगे पन्ने उलझी डायरी के ना …