Tag: रिश्ते

ग़ज़ल ( शायद दर्द से अपने रिश्ते पुराने लगते हैं)

वो हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हक़ीकत हम उनको समझाने लगते हैं जिस गलती पर हमको वो समझाने लगते है उस गलती को फिर क्यों …

दूर रह कर हमेशा हुए फासले

दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना हों कर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया करो पद पैसे की …

रिश्तों की कमीज..

रिश्ते भी कमीज सरीखे होते हैं.. कुछ नए..कुछ पुराने..तो कुछ फटे हुए.. नए वाले अच्छे हैं चमक है उनमें पार्टी फंक्शन में पहनता हूँ कुछ रौब भी जम जाता …