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मेरा ठिकाना-९ —मुक्तक—डी के निवातियाँ

मैया कहे परिलोक से आयी, कुंवर देश तोहे जाना पराया धन मेरे आंगन जिसे ब्याज समेत चुकाना ससुराल में सब ताने मारे, तू अपने मायके जा ना बिटिया बाबुल …