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मेरा ठिकाना -६—मुक्तक—डी. के. निवातियाँ

हर किसी का होता है जहान में एक ठिकाना राहे भले हो जुदा-जुदा मंजिल सभी को पाना उम्र बिता देता है हर कोई ये पहेली बुझाने में ना जान …