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मेरा ठिकाना-3—-(डी के निवातियाँ)

ना पूछो यारो मुझ से मेरा ठिकाना देश का वीर हूँ हर छोर मेरा घराना रण, थार, पठार सियाचीन की बर्फ जंगलो की झाडी अपना सिरहाना ।। ! !! …

मेरा ठिकाना—मुक्तक —(डी के निवातियाँ)

अक्सर लोग पूछते है मुझसे मेरा ठिकाना मै ठहरा बेघर परिंदा नही कोई आशियाना ठोकरे खाता फिरता हूँ सफर ऐ जिन्दगी में पा जाऊं मंजिल जिस रोज़, वही चले …