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मिसाल

सारा जहान तुझमें, तू क्यूँ भटक जाता है खुले आसमान का पंछी क्यूँ अटक जाता है कोई ख़ुशी बाहर नहीं है तुझसे चल संम्भल क्यों तू मचल जाता है …