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मगरूर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

मगरूर मैं तो डरता हूँ उसकी तारीफ़ करने से ……………………….. के कहीं वो ओर भी मगरूर ना हो जाये हम तो दीवाने हैं उसके हुस्न के ……………………………………… लगता है …