Tag: प्रभात सिंह राणा ‘भोर’

अच्छा है…! (अतिरिक्त)

प्रस्तुत कविता मेरे द्वारा पूर्व में “हिन्दी साहित्य” में प्रकाशित की गयी कविता “अच्छा है…!” से प्रेरित है और एक साथ दोनों ही बेहतर अर्थ प्रदान करती हैं, कृपया …