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नारी

बनाने को संगमरमरी मूरत जाने कितनी चोंटे खाती हो चलकर अंगारों पर भी तुम मन्द मन्द मुस्काती हो पोषित करती दूध रक्त से अंग प्रत्यंग बनाती हो सुकोमल प्रेम …