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नादान दिल …..डी. के. निवातियाँ _

साथ निभाना नही था तो जिंदगी में आये क्यों थे जन्मो के बंधन रिश्तो के धागे में पिराये क्यों थे जब मालूम था खिलना तुम्हे किसी और के चमन …