Tag: नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”

गीत : मिटटी वाले दीप

मिट्टी वाले दीये जलाना जो  चाहो  दीवाली  हो उजला-उजला पर्व मने कही  रात  न काली हो मिटटी वाले…………….. जब से चला चायना वाला, कुछ की किस्मत फूट गयी विपदा …

असमंजस : उत्कर्ष

【व्यथित मन से उत्पन्न एक दर्द भरा नगमा】 मेरी जिंदगी मझदार में है, अब कैसे पार उतारू…. सोचता पल पल यही में, कैसे खुद को निकालूँ…. वक़्त भी कम …

आराधना : उत्कर्ष

🙏🙏 आराधना 🙏🙏 दोहा• प्रातः उठ वंदन करूँ,चरण नवाऊँ शीश । यशोगान तेरा करूँ, इतना दो आशीष ।। सुन लो मेरी अरज भवानी । तेरी महिमा जग ने जानी …

दोहा इक्कीसी : उत्कर्ष

कविता लेखन सब करो,साध शिल्प अरु छंद । कविता खुद से बोलती, उपजे बहु आनंद ।। कविता लिखना सीखते,बड़े जतन के साथ । मुख को जोड़ा पैर से,धड़ से …

गजल ( मेरी ख्वाहिश ) : “उत्कर्ष”

🌹🌹गजल : मेरी ख्वाहिश🌹🌹 ★ ★ ★ ★ ★ देश की शान मैं यूं बढाता रहूँ । शीश झुकने न दूं मैं कटाता रहूँ । काट दूँ हाथ वो,जो …

मरुभूमि और महाराणा(दोहे) ः उत्कर्ष

★★मरुभूमि और महाराणा★★ पंद्रह सौ चालीसवाँ,कुम्भल राजस्थान । जन्म हुआ परताप का,जो माटी की शान ।। माता जीवत कँवर औ,तात उदय था नाम । पाकर ऐसे वीर को,धन्य हुआ …

मुक्तक ः उत्कर्ष

पास तुम्हारे मोहन बैठा, नजरें कहाँ निहार रही ? कहाँ तुम्हारा चित है डोला, क्या तुम सोच-विचार रही ? सुन राधे मैं हूँ बस तेरा इसी बात का ध्यान …

मुक्तक ः उत्कर्ष

हम आज़ादी के दीवाने है, ……. इंकलाब ही नारा है…. उतनी नही हमे जां प्यारी, …….जितना देश प्यारा है… बुरी निगाहे डालो ना तुम, ……..भारत की प्राचीरों पे.. खौला …