Tag: नजरो को कैसे चुरायेगा

नजरो को कैसे चुरायेगा—-(डी. के. निवातियाँ)

हे मानुष कर ले मनमानी एक दिन खुद पछतायेगा रे जैसे करम करेगा प्राणी फल वैसा ही यंहा पायेगा !! आज नहीं तो कल ही सही हे मानव सब …