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धीरज जाने कब टूटेगा:Er. Anand Sagar Pandey,”अनन्य देवरिया”

मेरे सीने से भी प्यार की खुश्बू आये मुमकिन है, मेरी आंखें भी प्रियवर के स्वप्न सजायें मुमकिन है, मेरी उंगली भी सावन सी जुल्फों में खो सकती है, …