Tag: दोस्त

ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगतें हैं अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं वह हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हकीकत हम …

दोस्त – अरूण कुमार झा बिट्टू

बच्चपन के दोस्त कही जब मिल जाते हैं। दिल मे दबे भाव भी लव पे खिल जाते हैं। गम्भीरता बातो से जाने कहा जाती हैं। बच्पन की बातो मे …