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तेरे लिये “माँ” —कविता—डी. के. निवातियाँ

तेरे लिये “माँ” कुछ नही मेरी झोली में, शब्द विहीन हूँ तेरे लिये माँ  ! जो भी करूँ कम पड़ता है, एक सजदे में तेरे लिये माँ !! ईश्वर …