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तर्पण —( डी. के. निवातिया )

करने आया था तर्पण अपने मात-पिता का अनायास ही मुझसे टकरा गया मैंने भी पूछ लिया, कैसे हो मित्र ! रुआंसा होकर बोला,  अच्छा हूँ मैंने फिर पूछ लिया, …