Tag: जाति व्यवस्था पर गजल

गैर बराबरी (गजल)

गजल (बह्र 2122 1122 1122 22) जख्मे दिल साथ लिए घूमते जाने कितने चाह समता की लिए आज दिवाने कितने।। जाति का दंश मुझे आज सताता है बहुत तोड़ने …