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गुमसुम—डी. के. निवातिया

कुछ तो बात है जो गुमसुम हो, राज-ए-दिल कभी खोला करो, दिल ऐ हालात नही तो न सही, अपने लबो से तो कुछ बोला करो… !! ! ! डी. …