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काव्य रो रहा है — डी के निवातिया

काव्य रो रहा है *** साहित्य में रस छंद अलंकारो का कलात्मक सौंदर्य अब खो रहा है। काव्य गोष्ठीयो में कविताओं की जगह जुमलो का पाठ हो रहा है …