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उजाले की डिबरी—डी. के. निवातिया

कर खुद को दफ़न फूलो की सेज सजाई जाती है इतनी आसानी कब मंजिल ऐ राह बनाई जाती है पीढ़िया गुजर जाती घने काले अंधेरो के साये में तब …