Tag: आशीष देवलिया

तुम्‍हारी कविता

मुश्किलों से जूझते लगभग टूटने की कगार से मैं वापस आया हर बार क्‍योंकि मैं जानता था बाकी हैं कुछ बहादुर शब्‍द जो उलझा सकेंगें वक्‍त को अभी और …