Tag: आतंक पर कविता

नापाक दरिन्दो को मेरी खरी खोटी

बरकत और इबादत के महीने को रमजान कहते है कर ले अपने को जो पाक उसे मुशलमान कहते है बेगुनाहों के बुजदिल कातिलों तुझे कौन सा नाम दूँ क्योकि …