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आज फिसल गया — डी के निवातिया

आज फिसल गया *** वक़्त भी अपनी चाल से आगे निकल गया भविष्य की चाहत में वर्तमान निगल गया भूत अपनी पहचान बनाने में अक्षम हुआ कल से कल …