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आकर देखो इन ‘वन’ में

भीतर किसी तरुणाई पर खग मृग अकुलाते हैं इनके घने अंधेरों में गूंगे भी शोर मचाते हैं | निष्ठा भी अंगड़ाई लेती इनके हरे बिछौनों पर जाने कितने जाल …