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अफ़सोस ——डी. के. निवातिया

लुटाकर हर ख़ुशी उम्र भर रो सकता हूँ मैं एक सिर्फ तुझे हँसाने के लिये , अश्को के सागर में खुद को बहा सकता हूँ मैं तेरे कपोलो के …