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अन्तर्यामी

तेरी धुन बिन सृष्टि बहुत प्यासी तुझे नाम क्या दूँ घट-घट वासी | नीतिनिधान हे रथचालक करुणावतार, प्रभु प्रतिपालक | मीरा मोह तुझपर हारी हे मोर मुकुट बंशीधारी | …