Author: Zeest

नज़्म – इंक़लाब / ज़ीस्त

मुझसे इस वास्ते ख़फ़ा हैं हमसुख़न मेरे मैंने क्यों अपने क़लम से न लहू बरसाया मैंने क्यों नाज़ुक-ओ-नर्म-ओ-गुदाज़ गीत लिखे क्यों नहीं एक भी शोला कहीं पे भड़काया मैंने …