Author: विजय कुमार सिंह

परदेश

कभी आवश्यकताओं ने मजबूरी दिखाकर भगा दिया, कभी तमन्नाओं ने गगन छूने को पंख लगा उड़ा दिया, दिल बहलता है पर माटी की खुशबू भुलाई जाती नहीं, परदेश ने …