Author: Vishwa Deepak

सफर पिता पुत्र का

पकड़ के मेरी छोटी उंगलीयों को, पहला कदम आसान बनाया, हर एक मुश्किल कदम पे पिताजी, मैंने आपको अपने साथ ही पाया।१। कितना सुन्दर था वो बचपन, जब गोद …

अब वो शाम नहीं आती

दोस्तों से मिलती, दिनचर्या की गीत सुनती, चाय की चुस्कीयों के साथ, अब वो शाम नहीं आती ॥१॥   दोस्तों में जोश बढाती, आशाओं के नये किरण जगती, हिम्मत …

कुछ यादें कभी नहीं जाती

  वो स्पेंसर और सिटी सेण्टर की शाम, सत्यम और इनोक्स में भीड़ की लम्बी आलम, कैंप रोड की जगमगाती और भागती रफ़्तार, वो पानी टंकी के मैदान में …