Author: virendra

शायरी

बगावत कैसी भी हो बेखौफ होनी चाहिए , रास्ते कैसे भी हो एक मंज़िल होनी चाहिए , वक़्त एक चीज़ जरूर सीखाता है , हालात कैसे भी हो कदमताल …

शायरी

बाटना सीख मुस्कराहट को हर सांस को बोझिल न बना , बहना सीख लेहरो की तरह अपने जीवन को स्थिर साहिल न बना , माना के संघर्ष आसान नहीं …

शायरी

इंसानियत कही नहीं लेकिन धर्म बहुत है ज़िन्दगी छोटी सी है लेकिन अरमान बहुत है , सोचता हु बढ़ती उम्र के साथ थोड़ी मासूमियत ही बचा लू , यहाँ …

“आजकल “

होती किस्मत मेरी इन सितारों में, तो देह मेरा पार्थिव न होता , डर बिकता है इन बाज़ारो में इसलिए , क्यूंकि मुस्कराहट का आजकल व्यापार नहीं होता || …

“किश्त “

अपने उसूलो पे ज़िन्दगी बसर कर , इन सामाजिक रीतियों में तेरी मासूमियत घट न जाए , अपनाना आसान होता है बुराइओं को सभी , कही ज़िन्दगी के किस्सों …

शायरी

खूब कोशिश कि तुझे कलम मे समेटने कि, लिखते लिखते ये स्याही अपना असर खोती रही, जिदंगी जीने के लिए जरूरत थी बहाने की, बस तु मुस्कुराती रही हमारी …

शायरी

लोगो कि ज़रुरते पुरी करने मे, ख्वाहिशें दिल कि यूहीं कफन हो गई, ढूढंने निकले थे सुकून जिदंगी मे, दुनिया के शोर मे मन कि आवाज दफन हो गई॥

“मै”

मैंने तृप्ति करी भूख की , ओढ़ने के लिए लिबाज़ बनाया , जब सब समझ ना सका जीवन में , मैने ही अंधविश्वास बनाया || मैंने ही महसूस किया …