Author: Vikram jajbaati

जख्मी परिंदे

परिंदे जख्मी मिलते है राहो चौराहों पर, पर चौराहों पर भीड़ है जिंदा लाशों और दरिंदों कि, की दरिंदों ने साज़िश है फ़िर हुए जख्मी परिंदे , परिंदे जख्मी …

साम्प्रदायिक हृदय

धर्म उन्माद मे भटके युवाओं को धर्म निरपेक्षता का सही अर्थ समझाता , नागरिक भारत का,एक धर्म मेरा भी ,पर इंसानियत इंसान को ही बताता । ये जज्बाती इंसान …

याद रही या भूल गया

जनवरी-फेबवरी याद रही,चैत्र-बैशाख भूल गया , हम मतलबी इंसान अपनो का हाल पूछना भूल गये । तारिक बदलना याद रही,बिगड़ी सीरत सुधरना भूल गये , मशरूफ़ हुए खुद मैं …