Author: Vikas Pandit

“सफर….एक ज़िन्दगी” SMOKE Edition MY POEM 7 AUG, 2011

ज़िन्दगी एक सुहानी सफर थी… विवशताओं से गुजरती डगर थी… कही ऊंची राहों कहीं गर्त ने घेरा… उसके अनछुए स्पर्श में लीन ह्रदय मेरा… जरूरी नही उस रिश्ते की …

वो खयाल तेरे.,.,.,!! (एक उर्दू कश्मकश) चौथी नवम्बर २०११.,.,., समय रात्रि १०.०८

फजर का सूरुर है… आंखों में नींद मेरे… कश्मकश मे डूबा दिल… लिये खयालात तेरे… हसीन शाम थी वो… हसीन थी रात भी… हर जिया लम्हा… रंगी मिजाज तेरे… …

“हमेशा तो मैं तुम्हारे…झूठे भरोसे मे जीता आया हुं!!!!” MY POEM of 9th Nov.2012

हमेशा तो मै तुम्हारे… झूठे भरोसे मे जीता आया हूं!! तुमने जो मुझे दिखाया… उसे मैने सच माना ! हर एक भ्रम को तुम्हारे… वास्तविकता मैंने जाना ! तुम्हारे …

हमसफर की यादों का सफर….!!! “पहली स्वसंवादित गद्य एवं पद्य रचना”… दिनांक ०२अगस्त,२०१२

हालांकि मै तभी लिखता, जब अन्दर से एक पुकार आती! क्योकी मेरी उलझनो का हल मुझे मिल गया था…पोईट्री!!!!!!! और तो और जब वाकई मन करता तो लगता के …