Author: वेद प्रकाश राय

एहसास – वेद प्रकाश राय

कहती है दुनिया जिसे प्यार, नशां हैं खतां हैं…. हमने भी किया हैं प्यार, इसलिए हमें भी पता हैं…. मिलती है थोड़ी खुशियाँ,ज्यादा गम पर इसमें ठोकर खाने का …

सिपाहीं

कलम का सिपाही हूं। कलम ही चलाता हूं। जोड़-जोड़ शब्दों को। कविता ही बनाता हूं। मन को तसल्ली मिलती है। जब कविता सुनाता हूं। नुक्स निकालने के लिए। कवियों …

मैं तो दिवाना – वेद प्रकाश राय

मुबारक हो सबको समा ये सुहाना मैं खुश हूँ मेरे आसूओंपे ना जाना मैं तो दीवाना, दीवाना, दीवाना हजारों तरह के ये होते हैं आँसू अगर दिल में ग़म …