Author: सुशील कुमार शर्मा

आशुतोषी माँ नर्मदा

आशुतोषी माँ नर्मदा (एक भक्त की क्षमा याचना ) सुशील शर्मा आशुतोषी माँ नर्मदा अभय का वरदान दो। शमित हो सब पाप मेरे ऐसा अंतर्ज्ञान दो। विषम अंतर्दाह की …

उस पार का जीवन

उस पार का जीवन सुशील कुमार शर्मा मृत्यु के उस पार क्या है एक और जीवन आधार। या घटाटोप अन्धकार। तीव्र आत्म प्रकाश। या क्षुब्द अमित प्यास। शरीर से …

मत रोना

मत रोना सुशील शर्मा मत रोना क्योंकि तुम्हे छोड़ दिया मैंने साथ कुछ कम ही था कुछ और जोड़ दिया तुमने। मत रोना क्योंकि नंदू जल्दी बड़ा होगा मत …

किसान चिंतित है

किसान चिंतित है सुशील शर्मा किसान चिंतित है फसल की प्यास से । किसान चिंतित है टूटते दरकते विश्वास से। किसान चिंतित है पसीने से तर बतर शरीरों से। …

क्या मै लिख सकूँगा

क्या मै लिख सकूँगा सुशील शर्मा कल एक पेड़ से मुलाकात हो गई। चलते चलते आँखों में कुछ बात हो गई। बोला पेड़ लिखते हो संवेदनाओं को। उकेरते हो …

पानी बचाना चाहिए

पानी बचाना चाहिए (सुशील कुमार शर्मा ) फेंका बहुत पानी अब उसको बचाना चाहिए। सूखे जर्द पौधों को अब जवानी चाहिए। वर्षा जल के संग्रहण का अब कोई उपाय …

बड़े खुश हैं हम

बड़े खुश हैं हम सुशील कुमार शर्मा बादल गुजर गया लेकिन बरसा नहीं। सूखी नदी हुआ अभी अरसा नहीं। धरती झुलस रही है लेकिन बड़े खुश हैं हम। नदी …

हे परीक्षा परिणाम ,मत डराओ बच्चों को

हे परीक्षा परिणाम ,मत डराओ बच्चों को सुशील शर्मा हे परीक्षा परिणाम मत सताओ बच्चों को, प्यारे बच्चों के मासूम दिलों से खेलना बंद करो। न जाने कितने मासूम …

अनुत्तरित प्रश्न

अनुत्तरित प्रश्न सुशील कुमार शर्मा एक जंगल था , बहुत प्यारा था सभी की आँख का तारा था। वक्त की आंधी आई, सभ्यता चमचमाती आई। इस सभ्यता के हाथ …

दहकता बुंदेलखंड

जीवन की बूंदों को तरसा भारत का एक खण्ड। सूरज जैसा दहक रहा हैं हमारा बुंदेलखंड। गाँव गली सुनसान है पनघट भी वीरान। टूटी पड़ी है नाव भी कुदरत …